आर्थिक तंगी नहीं रोक सकी उड़ान, ऑटो चालक के बेटे हरमन ने नेशनल MMA चैंपियनशिप में जीता कांस्य पदक

Auto driver's son Harman won a bronze medal at the National MMA Championship.

फरीदाबाद : कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो तो मुश्किलें भी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकतीं। फरीदाबाद के युवा खिलाड़ी हरमन सिंह ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। बेहद साधारण परिवार से आने वाले हरमन ने सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उन्होंने मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित अभय प्रशाल में आयोजित 9वीं MMA इंडिया नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर हरियाणा का नाम रोशन किया है।

यह प्रतियोगिता 24 से 26 जुलाई 2026 तक आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर से करीब 1,200 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। कड़े मुकाबलों के बीच हरमन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने पहले ही राष्ट्रीय टूर्नामेंट में कांस्य पदक हासिल किया। महज छह महीने पहले MMA की ट्रेनिंग शुरू करने वाले हरमन के लिए यह उपलब्धि बेहद खास है। हरमन ने बताया कि यह उनके करियर की पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता थी और पहले ही प्रयास में पदक जीतना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और कोच को दिया। हरमन के मुताबिक, प्रतियोगिता में देशभर के बेहतरीन खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, ऐसे में इतने कम समय की ट्रेनिंग के बाद राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।

आर्थिक हालात बने सबसे बड़ी चुनौती

हरमन एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। इसी सीमित आमदनी से परिवार हरमन की डाइट, ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाने की कोशिश करता है। MMA जैसे खेल में खिलाड़ियों को अच्छी डाइट, ट्रेनिंग और उपकरणों पर काफी खर्च करना पड़ता है। ऐसे में आर्थिक तंगी हरमन के सामने लगातार चुनौती बनी हुई है। हरमन ने बताया कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह 12वीं कक्षा के बाद अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सके। कई बार उनके पास ट्रेनिंग फीस जमा करने तक के पैसे नहीं होते थे। इसके बावजूद उन्होंने अपना सपना नहीं छोड़ा। उनके कोच ने भी मुश्किल समय में उनका साथ दिया और आर्थिक परेशानियों के कारण कभी ट्रेनिंग बंद नहीं होने दी।

तीन महीने की फीस भी बकाया

हरमन के कोच और किंग सेन फाइट क्लब से जुड़े आशीष ने बताया कि हरमन पिछले करीब छह महीने से उनके पास प्रशिक्षण ले रहे हैं। इससे पहले वह राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीत चुके हैं। अब अपने पहले ही नेशनल टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित कर दी है।कोच के मुताबिक हरमन बेहद मेहनती और प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है और कई बार वह अकादमी की फीस भी समय पर जमा नहीं कर पाते। फिलहाल उनकी करीब तीन महीने की फीस भी बकाया है। इसके बावजूद हरमन की मेहनत और लगन को देखते हुए उन्हें कभी प्रशिक्षण से रोका नहीं गया।

इंटरनेशनल प्रतियोगिता का मौका, लेकिन पैसे की कमी बनी बाधा

राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक जीतने के बाद हरमन को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने का अवसर भी मिला। लेकिन विदेश यात्रा और प्रतियोगिता से जुड़े खर्च खुद वहन करने की शर्त उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई। आर्थिक संसाधन नहीं होने के कारण वह इस अवसर का लाभ नहीं उठा सके। अब हरमन को उम्मीद है कि सरकार या कोई निजी संस्था उनकी मदद के लिए आगे आएगी। उनका कहना है कि अगर उन्हें आर्थिक सहायता और स्पॉन्सरशिप मिल जाए तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं और देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने का सपना पूरा कर सकते हैं।

हरमन की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष और जज्बे की मिसाल है। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने अपने पहले राष्ट्रीय मुकाबले में पदक जीतकर साबित कर दिया कि प्रतिभा को अगर सही मंच और अवसर मिले तो वह किसी भी परिस्थिति में चमक सकती है। अब हरमन का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए खेलना और देश के नाम स्वर्ण पदक करना है। जरूरत है तो सिर्फ सही सहयोग और आर्थिक समर्थन की, ताकि फरीदाबाद का यह युवा खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा सके और तिरंगे की शान बढ़ा सके।

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